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बंदा गरीब है – साईं भजन

बंदा गरीब है – साईं भजन

banda gareeb hai

 

मुझको तुम्हारी यह जुदाई मार डालेगी,
नजरें ना फेरना, तन्हाई मार डालेगी।

ए खुदा यह बता क्यूँ मिली बुझे बेगुनाई की सजा,
मर गया मैं मर गया यार है मुझ से खफा,
बेगुना मैं बुगुना मैं बेगुना।

मेरे हाथो की लकीरों का तमाशा मैं क्या जानू,
मानु मैं तो मानु साईं तुझे को ही मानु।
लाया ना मैं कोई नजराना, किस्सा अजीब है,
मांगने को हाथ भी नहीं है, बंदा गरीब है॥

अपनों ने मुझे ठुकराया, मैं साईं तेरे दर पे आ गया।
मैंने देखे है रंग दुनिया के, नज़ारा मुझे तेरा भा गया।
मुझे मिल गया, पालने वाला, मिल गया अल्ला वाला, मेरा नसीब है,
मांगने को हाथ भी नहीं है, बंदा गरीब है॥

हर मोड़ में है तुमने संभाला, साईं ने मुझे रोने ना दिया।
मुझे लोगो ने चाहा मिट जाए, साईं ने कुछ होने ना दिया।
उसे आंधियां मिटा ना सकेंगी, जो साईं के करीब है,
मांगने को हाथ भी नहीं है, बंदा गरीब है॥

जिस रात की ना हो कोई सुबह, वो रात साईं मेरी जिंदगी।
जिस बात का ना हो कोई मतलब, वो बात साईं मेरी जिंदगी।
जीना ठोकरों में है गर्दिश जिसकी, यह मेरा नसीब है,
मांगने को हाथ भी नहीं है, बंदा गरीब है॥

जो सर ना झुका किसी के आगे, वो सर तेरे दर पे झुक गया।
जो काफिला घर से चला था, वो आ के तेरे दर पे रुक गया।
सूफी हमसर यह दोहराए, साईं जी मेरा हबीब है,
मांगने को हाथ भी नहीं है, बंदा गरीब है॥

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